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Tuesday, 3 April 2018

April 03, 2018

क्या पडूं मैं ? hindi kahani 2018


क्या पडूं में ?
बाल कविता

मम्मी कहती कला-वाणिज्य पड़ो,
पापा कहते पड़ने को विज्ञानं |
अस्सी प्रतिशतअंक से पास किया,
मैने दसवी कक्षा का इम्तिहान |
समझ न आता | में क्या करूं ?
विषय को लेकर भटकता है ध्यान |
यार-दोस्त का कहना कुछ ऐसे,
पड़ो वही जो लगे तुम्हे आसान |
बुरी नही पुराने शिक्षको की बाते,
अच्छी शिक्षा वही, दे जो मुस्कान |
अड़ोसी-पडोसी की तो बात ही निराली,
बांटते वो बिन मांगे ही अपने ज्ञान |
आप सबसे मेरी विनती यही है,
बच्चो को ऐसे करे न परेशान |

Sunday, 25 March 2018

March 25, 2018

हथेली पर बाल क्यों नही story 2018


हथेली पर बाल क्यों नही है
एक दिन अकबर बादशाह के मन में एक बात आई की, ‘मेरी हथेली पर बाल क्यों नही है? बहुत सोचा पर उत्तर न मिल सका |’ उन्होंने बीरबल से पुछा की, ‘ऐसा क्यों है की मेरी हथेली पर बाल नही है? बीरबल हाजिर जवाब तो थे ही |’ उन्होंने एक दम जवाब दिया, आलम पनाह, आप इन्ही हाथो से गरीबो को रोजाना इतना दान देते है उसकी रगड से बाल जम नही पाते |’

      बादशाह उत्तर पाकर प्रसन्न हुए | फिर भी सोचा इसकी बुध्दि का परीक्षण किया जाए तो उन्होंने अगला प्रश्न किया-‘तुम्हारी हथेली पर बाल क्यों नही है? बीरबल ने तपाक से उतर दिया, आपकी ओर से भेट, दान, उपहार पुरस्कार लेते लेते उनकी रगड़ से मेरी हथेली पर भी बाल नही आते |
फिर बादशाह बोले, और लोगो की हथेली पर बाल क्यों नही आते |’ बीरबल बहुत स्वाभाविक ढंग से बोले की इसका उतर स्पष्ट है – जब आप मुझे यां अन्य लोगो को दान देते है और उन्हें नही देते तो वे बेचारे इर्ष्या के मारे अपने हाथ मलते रहते है इसी कारण उनकी भी हथेली पर बाल नही आते |’

March 25, 2018

आ री कोयल story 2018


आ री कोयल
आ री कोयल, गा री कोयल
मिटे गाने गा
मेरी इस नन्ही बगिया में
शाम-सुबह तू आ |
पक्षी आते, शोर मचाते
बगिया भर जाती
सूरज मुसकाता पेड़ो पर
किरण-किरण आती |
फूलो वाली, बड़ी निराली
बगिया है सुन्दर
दिनभर हवा चला करती है
गम-गम, मधुर-मधुर |
तू आएगी, तू गाएगी
सुन करके गाना
खिल-खिल-खिल हंस देगी बगिया
कोयल, तू आना |

Saturday, 24 March 2018

March 24, 2018

दो गधो का बोझ
बाल कहानी
एक बार बादशाह अकबर, उनके पुत्र सलीम और बीरबल फरवरी माह में प्रातः सेर को निकले | काफी दूर तक निकल गये | सोचा, अब वापिस भी चलना चाहिए | सूर्य देवता भी काफी ऊपर तक चड आए थे |
      वापिस की राह में बादशाह अकबर और उनके पुत्र सलीम को गर्मी लगने लगी तो बादशाह अकबर ने अपने भरी वस्त्र उतारे और बीरबल की और बड़ा दिए | उनकी देखा देखि शहजादे सलीम ने भी अपने भरी वस्त्र उतारे और बीरबल की और कपडे बड़ा दिए | बेचारे बीरबल इतना बोझ उठाकर चलने लगे |
बीरबल को इस प्रकार चलता देख बादशाह अकबर ने मजाक किया और कहा, ‘बीरबल, अब तो तुम्हारे ऊपर एक गधे का बोझ हो गया होगा |’ बीरबल ने भी एकदम हंसते हुए उत्तर दिया,
‘जहांपनाह, एक का नही बल्कि दो गधो का बोझ हो गया है |’
बादशाह अकबर ने जब जवाब सुना तो वो झेंप गये |

Wednesday, 21 March 2018

March 21, 2018

इम्तिहान से छुट्टी पाई hindi story 2018


इम्तिहान से छुट्टी पाई
बोडमजी ने इम्तिहान में,
खूब अक्ल का जोर लगाया |
अगली-बगली रहे झांकते,
फिर भी एक सवाल न आया ||
गिनते रहे होल की कड़ियां,
यों ही घंटे तिन बिताए |
कोरी कापी वही छोड़कर,
हंसी-ख़ुशी वापस घर आए ||
आकर खूब कबाड्डी खेले,
फिर यारो में गप्पे लड़ाई |
मोज-मजे से दिन गुजरकर,
इम्तिहान से छुट्टी पाई ||

Saturday, 17 March 2018

March 17, 2018

पक्षी जो उड़ नही सकता ज्ञान की बात 2018


पक्षी जो उड़ नही सकता
बाल कविता
पक्षियों की ऐसी अनेक प्रजातीय भी है जो जमीन पर दोड सकने में पूर्णत: समर्थ है, उड़ने में नही | फिर भी वे पक्षी की श्रेणी में ही आते है |
      शुतुरमुर्ग: शुतुरमुर्ग संसार के सबसे विशाल जीवित पक्षियों में से एक है | इनका वजन सामान्यतः 150 किलोग्राम से भी अधिक हो सकता है तथा ऊंचाई लगभग 3 मीटर होती है | नर शुतुरमुर्ग की पूंछ सफ़ेद एंव गर्दन काली होती है जबकि मादाओ की अपेक्षाक्रत छोटी एंव भूरे रंग की होती है |
शुतुरमुर्ग की दो अनोखी आदते है | पहली आदत के मुताबिक वह व्यर्थ वस्तुओं को निगल जाते है | व्यर्थ वस्तुओं में लोहे के टुकड़े, बोतलों की टोपीयां तथा इसी प्रकार की वस्तुए हो सकती है | रेगिस्तानि ऊंट की तरह वह भी कुछ दिनों तक बिना पानी के भी संतुष्ट रह सकते है | इसी गुण के करण इसे ऊंट पक्षी भी कहा गया है |
यह प्रति घंटा 40 कि. मी. की रफ्तार से दोड सकने में समर्थ है | इसकी टंगे भी ऊंट की ही तरह होने के करण यह लंबा होता है | दूसरी विशेषत काफी दिलचस्प है | इनके घोसले रेगिस्तानि बालू में आती साधारण होते है, जिसमे बहुत सी मादाएं एक ही घोसले में अपने ‍अंडे देती है | रात्री पहर में नर अन्डो को सेवता है | वेसे अंडे काफी बड़े होते है जिनका वजन 2 किलो ग्राम तक होता है |

March 17, 2018

बर्तन टूट गए कहानी 2018


बर्तन टूट गए
बाल कहानी
बचपन में ही चिनू के माता–पिता उसे रोता-बिलखता छोड़ एक दुर्घटना में अपनी जान गंवा चुके थे | तब वह लगभग 10 वर्ष का था |रिश्तेदारों ने कोई ध्यान नही दिया तो पडोस के एक सेट ने उसे नोकर रख लिया |
सेट-सेटानी बहुत दयालु स्वभाव के थे | वे उसे कभी डांटते-फटकारते नही थे | हर काम बड़े प्यार से करवाते थे | पर उनकी बेटी मोना बहुत घमंडी थी | सेट जी की इकलोती ओलाद होने के करण वह बहुत जिद्दी भी थी | वह जब-तक चिनू को डांटती रहती |
मोना के माता-पिता उसे समझाते की चिनू उसका भाई है मगर वह कभी उसे भाई मानने को तेयार नही होती थी | अतः जब कभी उसके माता-पिता कही जाते तो वे चिनू से उसका ख्याल रखने को कह जाते |
माता-पिता के जाते ही वह चिनू को तरह तरह से परेशान करना शुरू कर देती | जो काम करने के लिए चिनू उसे मना करता, वह वही करती |
एक दिन उसके माता पिता कही गए हुए थे | वह रसोई में जाकर कांच के बर्तनो को इधर-उधर रखने लगी | चिनू ने उसे मना किया तो वह तुनक कर बो बोली,’ये बर्तन तुम्हारे नही है, मेरे मम्मी पापा के है | मै कुछ भी करू, तुम्हे क्या मतलब |’
चिनू ने चुप रहना ही बेहतर समझ | वह बहार जाकर बेट गया | वह अभी आकर बैटा ही था की रसोई में जोर से कुछ टूटने की आवाज आई | वहां भागकर रसोई की तरफ दोडा | उसने वहां का द्रश्य देखा तो दंग रह गया |
सारी रसोई में कांच बीखरे पड़े थे और मोना वहां बेटकर रो रही थी |
‘यह क्या हुआ’ उसने आश्चर्य से मोना से पूछा |
वह जोर जोर से रोने लगी, फिर रोते रोते बोली, ‘ऊपर से भारी पतीला बर्तनो पर गिरा और बर्तन टूट गए |’
‘तुम्हे चोट तो नही आई |’ चिनू जल्दी से बोला | मोना ने रोते रोते ही न में सिर हिला दिया और उठकर बहार आ गई |
इतने में ही सेट सेटानी आ गए तो रसोई की हालात देखकर सन्न रह गए |
सेटानी ने चिनू को डांट लगाई, ‘क्या कर रहे थे तुम यहाँ? इतनी महंगी क्राकरी तोड़ कर रख दी |’ चिनू चुपचाप बहार आ गया व हाथ जोड़ कर बोला, मालकिन मुझे माफ़ कर दो |’
‘दफा हो जाओ यहा से |’ सेटानी चिलाई | इतने में चिनू डोडी-दोडी आई व रोते रोते माँ की सारी बात बता दी तो माँ ने उसे खूब डांटा |
मोना बोली, ‘चिनू भईया, मुझे माफ़ कर दो | मेरी वजह से तुम्हे माँ की डांट खानी पड़ी | मोना के मुहं से भईया शब्द सुनकर चिनू भावविभोर हो उठा |